भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 19 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 13.19 · प्रकृतिं पुरुषं चैव
प्रकृतिं पुरुषं चैव विद्ध्यनादी उभावपि ।
विकारांश्च गुणांश्चैव विद्धि प्रकृतिसंभवान् ॥
prakṛtiṃ puruṣaṃ caiva viddhyanādī ubhāvapi |
vikārāṃśca guṇāṃścaiva viddhi prakṛtisaṃbhavān ||
हिन्दी अनुवाद
प्रकृति और पुरुष, दोनों को अनादि जानो; और यह भी जानो कि सारे विकार और गुण प्रकृति से ही उत्पन्न होते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 13.19 का अर्थ क्या है?
प्रकृति और पुरुष, दोनों को अनादि जानो; और यह भी जानो कि सारे विकार और गुण प्रकृति से ही उत्पन्न होते हैं।
भगवद्गीता 13.19 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।