भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 18 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 13.18 · इति क्षेत्रं तथा ज्ञानं
इति क्षेत्रं तथा ज्ञानं ज्ञेयं चोक्तं समासतः ।
मद्भक्त एतद्विज्ञाय मद्भावायोपपद्यते ॥
iti kṣetraṃ tathā jñānaṃ jñeyaṃ coktaṃ samāsataḥ |
madbhakta etadvijñāya madbhāvāyopapadyate ||
हिन्दी अनुवाद
इस प्रकार क्षेत्र, ज्ञान और ज्ञेय का संक्षेप में वर्णन किया गया। मेरा भक्त इसे भली-भाँति समझकर मेरे भाव को प्राप्त होता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 13.18 का अर्थ क्या है?
इस प्रकार क्षेत्र, ज्ञान और ज्ञेय का संक्षेप में वर्णन किया गया। मेरा भक्त इसे भली-भाँति समझकर मेरे भाव को प्राप्त होता है।
भगवद्गीता 13.18 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।