भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 20 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 13.20 · कार्यकरणकर्तृत्वे हेतुः
कार्यकरणकर्तृत्वे हेतुः प्रकृतिरुच्यते ।
पुरुषः सुखदुःखानां भोक्तृत्वे हेतुरुच्यते ॥
kāryakaraṇakartṛtve hetuḥ prakṛtirucyate |
puruṣaḥ sukhaduḥkhānāṃ bhoktṛtve heturucyate ||
हिन्दी अनुवाद
कार्य, करण और कर्तापन को उत्पन्न करने में प्रकृति को कारण कहा जाता है; और सुख-दुःख के अनुभव में पुरुष को कारण कहा जाता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 13.20 का अर्थ क्या है?
कार्य, करण और कर्तापन को उत्पन्न करने में प्रकृति को कारण कहा जाता है; और सुख-दुःख के अनुभव में पुरुष को कारण कहा जाता है।
भगवद्गीता 13.20 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।