भगवद्गीता · अध्याय 10, श्लोक 35 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 10.35 · बृहत्साम तथा साम्नां

बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् ।
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ॥

bṛhatsāma tathā sāmnāṃ gāyatrī chandasāmaham |
māsānāṃ mārgaśīrṣo’hamṛtūnāṃ kusumākaraḥ ||

हिन्दी अनुवाद

साम-गानों में मैं बृहत्साम हूँ, छन्दों में गायत्री; महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ और ऋतुओं में फूलों से भरा वसन्त।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 10.35 का अर्थ क्या है?

साम-गानों में मैं बृहत्साम हूँ, छन्दों में गायत्री; महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ और ऋतुओं में फूलों से भरा वसन्त।

भगवद्गीता 10.35 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।