भगवद्गीता · अध्याय 10, श्लोक 36 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 10.36 · द्यूतं छलयतामस्मि
द्यूतं छलयतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् ।
जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि सत्त्वं सत्त्ववतामहम् ॥
dyūtaṃ chalayatāmasmi tejastejasvināmaham |
jayo’smi vyavasāyo’smi sattvaṃ sattvavatāmaham ||
हिन्दी अनुवाद
छल करने वालों में मैं जुआ हूँ, तेजस्वियों का तेज मैं हूँ। मैं ही विजय हूँ, मैं ही दृढ़ निश्चय हूँ, और सज्जनों का सत्त्व भी मैं ही हूँ।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 10.36 का अर्थ क्या है?
छल करने वालों में मैं जुआ हूँ, तेजस्वियों का तेज मैं हूँ। मैं ही विजय हूँ, मैं ही दृढ़ निश्चय हूँ, और सज्जनों का सत्त्व भी मैं ही हूँ।
भगवद्गीता 10.36 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।