भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 27 · संजय

भगवद्गीता 1.27 · श्वशुरान्सुहृदश्चैव

श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि ।
तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान् ॥

śvaśurānsuhṛdaścaiva senayorubhayorapi |
tānsamīkṣya sa kaunteyaḥ sarvānbandhūnavasthitān ||

हिन्दी अनुवाद

— ससुरों और हितैषियों को भी। उन सब बन्धु-बान्धवों को सामने खड़ा देखकर कुन्तीपुत्र अर्जुन —

प्रसंग

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 1.27 का अर्थ क्या है?

— ससुरों और हितैषियों को भी। उन सब बन्धु-बान्धवों को सामने खड़ा देखकर कुन्तीपुत्र अर्जुन —

भगवद्गीता 1.27 किसने कहा है?

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।