भगवद्गीता · अध्याय 5, श्लोक 25 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 5.25 · लभन्ते क्षीणकल्मषाः
लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः ।
छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥
labhante brahmanirvāṇamṛṣayaḥ kṣīṇakalmaṣāḥ |
chinnadvaidhā yatātmānaḥ sarvabhūtahite ratāḥ ||
हिन्दी अनुवाद
जिनके पाप मिट गए हैं, जिनके संशय कट गए हैं, जिन्होंने अपने मन को वश में किया है और जो सब प्राणियों के हित में लगे रहते हैं, वे ऋषि ब्रह्मनिर्वाण पाते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 5, कर्मसंन्यासयोग (कर्म-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 29 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 5.25 का अर्थ क्या है?
जिनके पाप मिट गए हैं, जिनके संशय कट गए हैं, जिन्होंने अपने मन को वश में किया है और जो सब प्राणियों के हित में लगे रहते हैं, वे ऋषि ब्रह्मनिर्वाण पाते हैं।
भगवद्गीता 5.25 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 5, कर्मसंन्यासयोग (कर्म-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।