भगवद्गीता · अध्याय 3, श्लोक 24 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 3.24 · उत्सीदेयुरिमे लोका न

उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम् ।
संकरस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः ॥

utsīdeyurime lokā na kuryāṃ karma cedaham |
saṃkarasya ca kartā syāmupahanyāmimāḥ prajāḥ ||

हिन्दी अनुवाद

यदि मैं कर्म न करूँ तो ये लोक नष्ट हो जाएँ; मैं अव्यवस्था (वर्णसंकर) का कारण बनूँ और इस प्रजा का नाश करने वाला ठहरूँ।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है। इस अध्याय में 43 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 3.24 का अर्थ क्या है?

यदि मैं कर्म न करूँ तो ये लोक नष्ट हो जाएँ; मैं अव्यवस्था (वर्णसंकर) का कारण बनूँ और इस प्रजा का नाश करने वाला ठहरूँ।

भगवद्गीता 3.24 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।