भगवद्गीता · अध्याय 3, श्लोक 23 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 3.23 · यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु
यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः ।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥
yadi hyahaṃ na varteyaṃ jātu karmaṇyatandritaḥ |
mama vartmānuvartante manuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥ ||
हिन्दी अनुवाद
हे पार्थ, यदि मैं कभी सावधान होकर कर्म में न लगूँ, तो मनुष्य हर प्रकार से मेरे ही मार्ग पर चलने लगेंगे।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है। इस अध्याय में 43 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 3.23 का अर्थ क्या है?
हे पार्थ, यदि मैं कभी सावधान होकर कर्म में न लगूँ, तो मनुष्य हर प्रकार से मेरे ही मार्ग पर चलने लगेंगे।
भगवद्गीता 3.23 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।