भगवद्गीता · अध्याय 3, श्लोक 19 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 3.19 · तस्मादसक्तः सततं कार्यं

तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर ।
असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः ॥

tasmādasaktaḥ satataṃ kāryaṃ karma samācara |
asakto hyācarankarma paramāpnoti pūruṣaḥ ||

हिन्दी अनुवाद

इसलिए आसक्ति के बिना सदा अपना कर्तव्य कर्म करते रहो; क्योंकि अनासक्त होकर कर्म करने वाला मनुष्य परम को प्राप्त होता है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है। इस अध्याय में 43 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 3.19 का अर्थ क्या है?

इसलिए आसक्ति के बिना सदा अपना कर्तव्य कर्म करते रहो; क्योंकि अनासक्त होकर कर्म करने वाला मनुष्य परम को प्राप्त होता है।

भगवद्गीता 3.19 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।