भगवद्गीता · अध्याय 3, श्लोक 18 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 3.18 · नैव तस्य कृतेनार्थो
नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन ।
न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयः ॥
naiva tasya kṛtenārtho nākṛteneha kaścana |
na cāsya sarvabhūteṣu kaścidarthavyapāśrayaḥ ||
हिन्दी अनुवाद
ऐसे व्यक्ति का इस संसार में न कर्म करने से कोई प्रयोजन है, न कर्म न करने से; और किसी भी प्राणी पर उसका कोई स्वार्थ टिका नहीं होता।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है। इस अध्याय में 43 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 3.18 का अर्थ क्या है?
ऐसे व्यक्ति का इस संसार में न कर्म करने से कोई प्रयोजन है, न कर्म न करने से; और किसी भी प्राणी पर उसका कोई स्वार्थ टिका नहीं होता।
भगवद्गीता 3.18 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।