भगवद्गीता · अध्याय 17, श्लोक 8 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 17.8 · आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः
आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः ।
रस्याः स्निग्धाः स्थिरा हृद्या आहाराः सात्त्विकप्रियाः ॥
āyuḥsattvabalārogyasukhaprītivivardhanāḥ |
rasyāḥ snigdhāḥ sthirā hṛdyā āhārāḥ sāttvikapriyāḥ ||
हिन्दी अनुवाद
आयु, सत्त्व, बल, आरोग्य, सुख और प्रसन्नता बढ़ाने वाले, रसीले, स्निग्ध, देर तक पोषण देने वाले और मन को भाने वाले भोजन सात्त्विक लोगों को प्रिय होते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 17, श्रद्धात्रयविभागयोग (श्रद्धात्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 28 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 17.8 का अर्थ क्या है?
आयु, सत्त्व, बल, आरोग्य, सुख और प्रसन्नता बढ़ाने वाले, रसीले, स्निग्ध, देर तक पोषण देने वाले और मन को भाने वाले भोजन सात्त्विक लोगों को प्रिय होते हैं।
भगवद्गीता 17.8 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 17, श्रद्धात्रयविभागयोग (श्रद्धात्रय विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।