भगवद्गीता · अध्याय 16, श्लोक 11 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 16.11 · चिन्तामपरिमेयां च

चिन्तामपरिमेयां च प्रलयान्तामुपाश्रिताः ।
कामोपभोगपरमा एतावदिति निश्चिताः ॥

cintāmaparimeyāṃ ca pralayāntāmupāśritāḥ |
kāmopabhogaparamā etāvaditi niścitāḥ ||

हिन्दी अनुवाद

मृत्यु तक चलने वाली अनगिनत चिन्ताओं में डूबे हुए, कामनाओं की पूर्ति को ही सबसे बड़ा लक्ष्य मानते हुए, और यह निश्चय किए हुए कि बस यही सब कुछ है —

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 16, दैवासुरसम्पद्विभागयोग (दैवासुर संपद विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 24 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 16.11 का अर्थ क्या है?

मृत्यु तक चलने वाली अनगिनत चिन्ताओं में डूबे हुए, कामनाओं की पूर्ति को ही सबसे बड़ा लक्ष्य मानते हुए, और यह निश्चय किए हुए कि बस यही सब कुछ है —

भगवद्गीता 16.11 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 16, दैवासुरसम्पद्विभागयोग (दैवासुर संपद विभाग योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।