भगवद्गीता · अध्याय 14, श्लोक 20 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 14.20 · गुणानेतानतीत्य
गुणानेतानतीत्य त्रीन्देही देहसमुद्भवान् ।
जन्ममृत्युजरादुःखैर्विमुक्तोऽमृतमश्नुते ॥
guṇānetānatītya trīndehī dehasamudbhavān |
janmamṛtyujarāduḥkhairvimukto’mṛtamaśnute ||
हिन्दी अनुवाद
शरीर की उत्पत्ति के कारण इन तीनों गुणों को पार करके देही जन्म, मृत्यु, बुढ़ापे और दुःखों से छूट जाता है और अमृत का अनुभव करता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 27 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 14.20 का अर्थ क्या है?
शरीर की उत्पत्ति के कारण इन तीनों गुणों को पार करके देही जन्म, मृत्यु, बुढ़ापे और दुःखों से छूट जाता है और अमृत का अनुभव करता है।
भगवद्गीता 14.20 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।