भगवद्गीता · अध्याय 14, श्लोक 18 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 14.18 · ऊर्ध्वं गच्छन्ति मध्ये
ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः ।
जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः ॥
ūrdhvaṃ gacchanti sattvasthā madhye tiṣṭhanti rājasāḥ |
jaghanyaguṇavṛttisthā adho gacchanti tāmasāḥ ||
हिन्दी अनुवाद
सत्त्व में स्थित लोग ऊपर उठते हैं; राजस लोग बीच में रहते हैं; और निचले गुण की वृत्तियों में रहने वाले तामस लोग नीचे गिरते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 27 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 14.18 का अर्थ क्या है?
सत्त्व में स्थित लोग ऊपर उठते हैं; राजस लोग बीच में रहते हैं; और निचले गुण की वृत्तियों में रहने वाले तामस लोग नीचे गिरते हैं।
भगवद्गीता 14.18 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।