भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 16 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 13.16 · अविभक्तं च भूतेषु च
अविभक्तं च भूतेषु विभक्तमिव च स्थितम् ।
भूतभर्तृ च तज्ज्ञेयं ग्रसिष्णु प्रभविष्णु च ॥
avibhaktaṃ ca bhūteṣu vibhaktamiva ca sthitam |
bhūtabhartṛ ca tajjñeyaṃ grasiṣṇu prabhaviṣṇu ca ||
हिन्दी अनुवाद
वह अविभक्त है, फिर भी प्राणियों में बँटा हुआ-सा प्रतीत होता है। उसे प्राणियों का पालनकर्ता, संहारकर्ता और उत्पत्तिकर्ता जानना चाहिए।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 13.16 का अर्थ क्या है?
वह अविभक्त है, फिर भी प्राणियों में बँटा हुआ-सा प्रतीत होता है। उसे प्राणियों का पालनकर्ता, संहारकर्ता और उत्पत्तिकर्ता जानना चाहिए।
भगवद्गीता 13.16 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।