भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 13 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 13.13 · सर्वतः पाणिपादं
सर्वतः पाणिपादं तत्सर्वतोऽक्षिशिरोमुखम् ।
सर्वतः श्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति ॥
sarvataḥ pāṇipādaṃ tatsarvato’kṣiśiromukham |
sarvataḥ śrutimalloke sarvamāvṛtya tiṣṭhati ||
हिन्दी अनुवाद
उसके हाथ-पैर सब ओर हैं, आँखें, सिर और मुख सब ओर हैं, कान भी सब ओर हैं। वह संसार में सबको घेरकर स्थित है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 13.13 का अर्थ क्या है?
उसके हाथ-पैर सब ओर हैं, आँखें, सिर और मुख सब ओर हैं, कान भी सब ओर हैं। वह संसार में सबको घेरकर स्थित है।
भगवद्गीता 13.13 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।