भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 49 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 11.49 · मा ते व्यथा मा च
मा ते व्यथा मा च विमूढभावो
दृष्ट्वा रूपं घोरमीदृङ्ममेदम् ।
व्यपेतभीः प्रीतमनाः पुनस्त्वं
तदेव मे रूपमिदं प्रपश्य ॥
mā te vyathā mā ca vimūḍhabhāvo
dṛṣṭvā rūpaṃ ghoramīdṛṅmamedam |
vyapetabhīḥ prītamanāḥ punastvaṃ
tadeva me rūpamidaṃ prapaśya ||
हिन्दी अनुवाद
मेरे इस भयंकर रूप को देखकर तुम न डरो, न घबराओ। भय छोड़कर प्रसन्न मन से मेरे उसी परिचित रूप को फिर से देखो।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 11.49 का अर्थ क्या है?
मेरे इस भयंकर रूप को देखकर तुम न डरो, न घबराओ। भय छोड़कर प्रसन्न मन से मेरे उसी परिचित रूप को फिर से देखो।
भगवद्गीता 11.49 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।