भगवद्गीता · अध्याय 10, श्लोक 31 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 10.31 · पवनः पवतामस्मि रामः
पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम् ।
झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी ॥
pavanaḥ pavatāmasmi rāmaḥ śastrabhṛtāmaham |
jhaṣāṇāṃ makaraścāsmi srotasāmasmi jāhnavī ||
हिन्दी अनुवाद
पवित्र करने वालों में मैं वायु हूँ, शस्त्रधारियों में राम; जलजीवों में मैं मगर हूँ और नदियों में गंगा।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 10.31 का अर्थ क्या है?
पवित्र करने वालों में मैं वायु हूँ, शस्त्रधारियों में राम; जलजीवों में मैं मगर हूँ और नदियों में गंगा।
भगवद्गीता 10.31 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।