भगवद्गीता · अध्याय 10, श्लोक 30 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 10.30 · प्रह्लादश्चास्मि कालः
प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानां कालः कलयतामहम् ।
मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहं वैनतेयश्च पक्षिणाम् ॥
prahlādaścāsmi daityānāṃ kālaḥ kalayatāmaham |
mṛgāṇāṃ ca mṛgendro’haṃ vainateyaśca pakṣiṇām ||
हिन्दी अनुवाद
दैत्यों में मैं प्रह्लाद हूँ, गणना करने वालों में काल; पशुओं में मैं सिंह हूँ और पक्षियों में विनता-पुत्र गरुड़।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 10.30 का अर्थ क्या है?
दैत्यों में मैं प्रह्लाद हूँ, गणना करने वालों में काल; पशुओं में मैं सिंह हूँ और पक्षियों में विनता-पुत्र गरुड़।
भगवद्गीता 10.30 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।