भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 7 · संजय

भगवद्गीता 1.7 · अस्माकं तु विशिष्टा ये

अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम ।
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते ॥

asmākaṃ tu viśiṣṭā ye tānnibodha dvijottama |
nāyakā mama sainyasya saṃjñārthaṃ tānbravīmi te ||

हिन्दी अनुवाद

हे द्विजश्रेष्ठ, अब हमारी ओर के प्रमुख योद्धाओं को भी जान लीजिए, जो मेरी सेना के नायक हैं। आपकी जानकारी के लिए मैं उनके नाम बताता हूँ।

प्रसंग

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 1.7 का अर्थ क्या है?

हे द्विजश्रेष्ठ, अब हमारी ओर के प्रमुख योद्धाओं को भी जान लीजिए, जो मेरी सेना के नायक हैं। आपकी जानकारी के लिए मैं उनके नाम बताता हूँ।

भगवद्गीता 1.7 किसने कहा है?

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।