भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 6 · संजय

भगवद्गीता 1.6 · युधामन्युश्च विक्रान्त

युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान् ।
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः ॥

yudhāmanyuśca vikrānta uttamaujāśca vīryavān |
saubhadro draupadeyāśca sarva eva mahārathāḥ ||

हिन्दी अनुवाद

— पराक्रमी युधामन्यु, बलवान उत्तमौजा, सुभद्रा का पुत्र (अभिमन्यु) और द्रौपदी के पुत्र — ये सभी महारथी हैं।

प्रसंग

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 1.6 का अर्थ क्या है?

— पराक्रमी युधामन्यु, बलवान उत्तमौजा, सुभद्रा का पुत्र (अभिमन्यु) और द्रौपदी के पुत्र — ये सभी महारथी हैं।

भगवद्गीता 1.6 किसने कहा है?

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।