भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 3 · संजय

भगवद्गीता 1.3 · पश्यैतां महतीं चमूम्

पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम् ।
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ॥

paśyaitāṃ pāṇḍuputrāṇāmācārya mahatīṃ camūm |
vyūḍhāṃ drupadaputreṇa tava śiṣyeṇa dhīmatā ||

हिन्दी अनुवाद

हे आचार्य, पाण्डुपुत्रों की इस विशाल सेना को देखिए, जिसे आपके ही बुद्धिमान शिष्य, द्रुपद के पुत्र (धृष्टद्युम्न) ने व्यूह में खड़ा किया है।

प्रसंग

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 1.3 का अर्थ क्या है?

हे आचार्य, पाण्डुपुत्रों की इस विशाल सेना को देखिए, जिसे आपके ही बुद्धिमान शिष्य, द्रुपद के पुत्र (धृष्टद्युम्न) ने व्यूह में खड़ा किया है।

भगवद्गीता 1.3 किसने कहा है?

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।