भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 2 · संजय

भगवद्गीता 1.2 · दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं

दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा ।
आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत् ॥

dṛṣṭvā tu pāṇḍavānīkaṃ vyūḍhaṃ duryodhanastadā |
ācāryamupasaṃgamya rājā vacanamabravīt ||

हिन्दी अनुवाद

संजय बोले: पाण्डवों की सेना को व्यूह में सजी देखकर राजा दुर्योधन अपने आचार्य द्रोण के पास गया और उनसे यह बात कही।

प्रसंग

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 1.2 का अर्थ क्या है?

संजय बोले: पाण्डवों की सेना को व्यूह में सजी देखकर राजा दुर्योधन अपने आचार्य द्रोण के पास गया और उनसे यह बात कही।

भगवद्गीता 1.2 किसने कहा है?

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।