भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 11 · संजय
भगवद्गीता 1.11 · अयनेषु च सर्वेषु
अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः ।
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ॥
ayaneṣu ca sarveṣu yathābhāgamavasthitāḥ |
bhīṣmamevābhirakṣantu bhavantaḥ sarva eva hi ||
हिन्दी अनुवाद
इसलिए आप सब लोग सेना के सभी मोर्चों पर अपनी-अपनी जगह डटे रहकर हर ओर से भीष्म की ही रक्षा करें।
प्रसंग
यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 1.11 का अर्थ क्या है?
इसलिए आप सब लोग सेना के सभी मोर्चों पर अपनी-अपनी जगह डटे रहकर हर ओर से भीष्म की ही रक्षा करें।
भगवद्गीता 1.11 किसने कहा है?
यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।