भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 10 · संजय

भगवद्गीता 1.10 · अपर्याप्तं तदस्माकं बलं

अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम् ।
पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् ॥

aparyāptaṃ tadasmākaṃ balaṃ bhīṣmābhirakṣitam |
paryāptaṃ tvidameteṣāṃ balaṃ bhīmābhirakṣitam ||

हिन्दी अनुवाद

भीष्म द्वारा रक्षित हमारी शक्ति अपार है, जबकि भीम द्वारा रक्षित उनकी शक्ति सीमित है।

प्रसंग

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 1.10 का अर्थ क्या है?

भीष्म द्वारा रक्षित हमारी शक्ति अपार है, जबकि भीम द्वारा रक्षित उनकी शक्ति सीमित है।

भगवद्गीता 1.10 किसने कहा है?

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।