पूजा विधि · भगवान शिव
महाशिवरात्रि पूजा विधि (चार प्रहर पूजा)
महाशिवरात्रि पर भक्त उपवास और जागरण करते हैं, और रात के चारों प्रहरों में शिवलिंग की पूजा करते हैं। सबसे पवित्र समय आधी रात के आसपास का निशीथ काल है। शाम या आधी रात की एक पूजा भी अपने आप में पूर्ण है।
कब करें: महाशिवरात्रि की पूरी रात। चारों प्रहरों का समय और निशीथ काल नीचे नई दिल्ली के लिए दिया गया है।
महाशिवरात्रि · 6 मार्च 2027 · नई दिल्ली
| प्रथम प्रहर पूजा | 18:23 – 21:28 |
|---|---|
| द्वितीय प्रहर पूजा | 21:28 – 00:32 (7 मार्च) |
| तृतीय प्रहर पूजा | 00:32 (7 मार्च) – 03:36 (7 मार्च) |
| चतुर्थ प्रहर पूजा | 03:36 (7 मार्च) – 06:40 (7 मार्च) |
| निशीथ काल | 00:07 (7 मार्च) – 00:56 (7 मार्च) |
समय आपके शहर के अनुसार बदलता है। अपने शहर का पंचांग देखें।
पूजा सामग्री
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प्रसाद और नैवेद्य
फल (ख़ास तौर पर बेर), ठंडाई, और दूध से बनी मिठाइयाँ।
आरती और स्तोत्र
मंत्र
ॐ नमः शिवाय — मंत्र जाप काउंटर के साथ
पूजा विधि: चरण-दर-चरण
संकल्प और व्रत
सुबह शिव जी के व्रत और पूजा का संकल्प लें। बहुत से लोग फलाहार और दूध पर व्रत रखते हैं; कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं।
अभिषेक
पंचाक्षर मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग को पहले जल से, फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएँ, और हर द्रव्य के बीच जल चढ़ाएँ।
ॐ नमः शिवाय
बेलपत्र और फूल अर्पित करें
चंदन और भस्म लगाएँ, फिर बेलपत्र (चिकनी सतह ऊपर रखकर), धतूरा, सफ़ेद फूल और अक्षत अर्पित करें।
धूप, दीप और नैवेद्य
धूप, दीप और फल-मिठाई का नैवेद्य अर्पित करें, फिर शिवलिंग की आधी परिक्रमा करें — परंपरा के अनुसार अभिषेक का जल जिस नाली (जलाधारी) से बहता है, उसे लाँघना नहीं चाहिए।
जाप और स्तोत्र
रुद्राक्ष की माला पर “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें और लिंगाष्टकम या शिव पंचाक्षर स्तोत्र जैसे स्तोत्रों का पाठ करें।
हर प्रहर में दोहराएँ
रात के चारों प्रहरों में अभिषेक और अर्पण दोहराएँ — परंपरा के अनुसार पहले प्रहर में दूध से, दूसरे में दही से, तीसरे में घी से और चौथे में शहद से।
आरती और पारण
हर प्रहर के अंत में शिव जी की आरती करें। अगली सुबह सूर्योदय के बाद, अंतिम पूजा करके व्रत का पारण करें।
ध्यान रखने योग्य बातें
- शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम या केतकी के फूल न चढ़ाएँ — परंपरा के अनुसार शिव पूजा में इनका प्रयोग नहीं होता।
- बेलपत्र साबुत होने चाहिए, कटे-फटे नहीं।
- जो लोग व्रत नहीं रख सकते या जाग नहीं सकते, वे भी निशीथ काल में सच्चे मन से एक पूजा कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महाशिवरात्रि 2027 कब है?
महाशिवरात्रि शनिवार, 6 मार्च 2027 को है (नई दिल्ली)। निशीथ काल: 00:07 (7 मार्च) – 00:56 (7 मार्च)।
निशीथ काल क्या है?
यह रात के पंद्रह मुहूर्तों में से आठवाँ मुहूर्त है, आधी रात के आसपास — शिवरात्रि पर शिव पूजा के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है।
क्या महिलाएँ शिवरात्रि की पूजा कर सकती हैं?
हाँ। शिवरात्रि सभी मनाते हैं, और बहुत-सी महिलाएँ परिवार के कल्याण के लिए यह व्रत रखती हैं।