भगवद्गीता · अध्याय 9, श्लोक 4 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 9.4 · मया ततमिदं सर्वं
मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना ।
मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाहं तेष्ववस्थितः ॥
mayā tatamidaṃ sarvaṃ jagadavyaktamūrtinā |
matsthāni sarvabhūtāni na cāhaṃ teṣvavasthitaḥ ||
हिन्दी अनुवाद
मेरे अव्यक्त रूप से यह सारा जगत व्याप्त है। सब प्राणी मुझमें स्थित हैं, पर मैं उनमें स्थित नहीं हूँ।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 9.4 का अर्थ क्या है?
मेरे अव्यक्त रूप से यह सारा जगत व्याप्त है। सब प्राणी मुझमें स्थित हैं, पर मैं उनमें स्थित नहीं हूँ।
भगवद्गीता 9.4 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।