भगवद्गीता · अध्याय 9, श्लोक 21 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 9.21 · ते तं भुक्त्वा विशालं
ते तं भुक्त्वा स्वर्गलोकं विशालं
क्षीणे पुण्ये मर्त्यलोकं विशन्ति ।
एवं त्रयीधर्ममनुप्रपन्ना
गतागतं कामकामा लभन्ते ॥
te taṃ bhuktvā svargalokaṃ viśālaṃ
kṣīṇe puṇye martyalokaṃ viśanti |
evaṃ trayīdharmamanuprapannā
gatāgataṃ kāmakāmā labhante ||
हिन्दी अनुवाद
उस विशाल स्वर्गलोक को भोगकर, पुण्य क्षीण होने पर वे फिर मृत्युलोक में आ जाते हैं। इस प्रकार तीनों वेदों के कर्मकाण्ड का आश्रय लेने वाले भोगों के इच्छुक लोग बार-बार आते-जाते रहते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 9.21 का अर्थ क्या है?
उस विशाल स्वर्गलोक को भोगकर, पुण्य क्षीण होने पर वे फिर मृत्युलोक में आ जाते हैं। इस प्रकार तीनों वेदों के कर्मकाण्ड का आश्रय लेने वाले भोगों के इच्छुक लोग बार-बार आते-जाते रहते हैं।
भगवद्गीता 9.21 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।