भगवद्गीता · अध्याय 8, श्लोक 26 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 8.26 · शुक्लकृष्णे गती ह्येते
शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते ।
एकया यात्यनावृत्तिमन्ययावर्तते पुनः ॥
śuklakṛṣṇe gatī hyete jagataḥ śāśvate mate |
ekayā yātyanāvṛttimanyayāvartate punaḥ ||
हिन्दी अनुवाद
जगत के ये दो मार्ग — शुक्ल और कृष्ण — सनातन माने गए हैं। एक से जाने वाला लौटता नहीं, और दूसरे से जाने वाला फिर लौट आता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है। इस अध्याय में 28 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 8.26 का अर्थ क्या है?
जगत के ये दो मार्ग — शुक्ल और कृष्ण — सनातन माने गए हैं। एक से जाने वाला लौटता नहीं, और दूसरे से जाने वाला फिर लौट आता है।
भगवद्गीता 8.26 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।