भगवद्गीता · अध्याय 7, श्लोक 29 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 7.29 · जरामरणमोक्षाय यतन्ति ये

जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये ।
ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम् ॥

jarāmaraṇamokṣāya māmāśritya yatanti ye |
te brahma tadviduḥ kṛtsnamadhyātmaṃ karma cākhilam ||

हिन्दी अनुवाद

जो मेरी शरण लेकर बुढ़ापे और मृत्यु से छुटकारे के लिए प्रयत्न करते हैं, वे ब्रह्म को, सम्पूर्ण अध्यात्म को और समस्त कर्म को जान लेते हैं।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है। इस अध्याय में 30 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 7.29 का अर्थ क्या है?

जो मेरी शरण लेकर बुढ़ापे और मृत्यु से छुटकारे के लिए प्रयत्न करते हैं, वे ब्रह्म को, सम्पूर्ण अध्यात्म को और समस्त कर्म को जान लेते हैं।

भगवद्गीता 7.29 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।