भगवद्गीता · अध्याय 7, श्लोक 2 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 7.2 · ज्ञानं तेऽहं
ज्ञानं तेऽहं सविज्ञानमिदं वक्ष्याम्यशेषतः ।
यज्ज्ञात्वा नेह भूयोऽन्यज्ज्ञातव्यमवशिष्यते ॥
jñānaṃ te’haṃ savijñānamidaṃ vakṣyāmyaśeṣataḥ |
yajjñātvā neha bhūyo’nyajjñātavyamavaśiṣyate ||
हिन्दी अनुवाद
मैं तुम्हें यह ज्ञान उसके अनुभव (विज्ञान) सहित पूरा-पूरा बताऊँगा, जिसे जान लेने के बाद इस संसार में और कुछ जानना शेष नहीं रह जाता।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है। इस अध्याय में 30 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 7.2 का अर्थ क्या है?
मैं तुम्हें यह ज्ञान उसके अनुभव (विज्ञान) सहित पूरा-पूरा बताऊँगा, जिसे जान लेने के बाद इस संसार में और कुछ जानना शेष नहीं रह जाता।
भगवद्गीता 7.2 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।