भगवद्गीता · अध्याय 7, श्लोक 1 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 7.1 · मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं
मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः ।
असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ॥
mayyāsaktamanāḥ pārtha yogaṃ yuñjanmadāśrayaḥ |
asaṃśayaṃ samagraṃ māṃ yathā jñāsyasi tacchṛṇu ||
हिन्दी अनुवाद
श्रीभगवान बोले: हे पार्थ, सुनो — मन को मुझमें लगाकर, योग का अभ्यास करते हुए और मेरा आश्रय लेकर तुम मुझे किस प्रकार पूरी तरह और निःसंदेह जान सकोगे।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है। इस अध्याय में 30 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 7.1 का अर्थ क्या है?
श्रीभगवान बोले: हे पार्थ, सुनो — मन को मुझमें लगाकर, योग का अभ्यास करते हुए और मेरा आश्रय लेकर तुम मुझे किस प्रकार पूरी तरह और निःसंदेह जान सकोगे।
भगवद्गीता 7.1 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।