भगवद्गीता · अध्याय 6, श्लोक 16 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 6.16 · नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति

नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः ।
न चाति स्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन ॥

nātyaśnatastu yogo’sti na caikāntamanaśnataḥ |
na cāti svapnaśīlasya jāgrato naiva cārjuna ||

हिन्दी अनुवाद

हे अर्जुन, योग न बहुत अधिक खाने वाले का सिद्ध होता है, न बिल्कुल न खाने वाले का; न बहुत सोने वाले का, न सदा जागते रहने वाले का।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 6.16 का अर्थ क्या है?

हे अर्जुन, योग न बहुत अधिक खाने वाले का सिद्ध होता है, न बिल्कुल न खाने वाले का; न बहुत सोने वाले का, न सदा जागते रहने वाले का।

भगवद्गीता 6.16 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।