भगवद्गीता · अध्याय 4, श्लोक 36 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 4.36 · अपि चेदसि पापेभ्यः
अपि चेदसि पापेभ्यः सर्वेभ्यः पापकृत्तमः ।
सर्वं ज्ञानप्लवेनैव वृजिनं सन्तरिष्यसि ॥
api cedasi pāpebhyaḥ sarvebhyaḥ pāpakṛttamaḥ |
sarvaṃ jñānaplavenaiva vṛjinaṃ santariṣyasi ||
हिन्दी अनुवाद
यदि तुम सब पापियों से भी बढ़कर पापी हो, तब भी ज्ञान की नौका से सारे पाप के सागर को पार कर जाओगे।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 4.36 का अर्थ क्या है?
यदि तुम सब पापियों से भी बढ़कर पापी हो, तब भी ज्ञान की नौका से सारे पाप के सागर को पार कर जाओगे।
भगवद्गीता 4.36 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।