भगवद्गीता · अध्याय 4, श्लोक 3 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 4.3 · स एवायं मया तेऽद्य योगः

स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः ।
भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम् ॥

sa evāyaṃ mayā te’dya yogaḥ proktaḥ purātanaḥ |
bhakto’si me sakhā ceti rahasyaṃ hyetaduttamam ||

हिन्दी अनुवाद

वही पुरातन योग आज मैंने तुम्हें बताया है, क्योंकि तुम मेरे भक्त और मित्र हो। यह निश्चय ही परम रहस्य है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 4.3 का अर्थ क्या है?

वही पुरातन योग आज मैंने तुम्हें बताया है, क्योंकि तुम मेरे भक्त और मित्र हो। यह निश्चय ही परम रहस्य है।

भगवद्गीता 4.3 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।