भगवद्गीता · अध्याय 4, श्लोक 29 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 4.29 · अपाने जुह्वति प्राणं
अपाने जुह्वति प्राणं प्राणेऽपानं तथापरे ।
प्राणापानगती रुद्ध्वा प्राणायामपरायणाः ॥
apāne juhvati prāṇaṃ prāṇe’pānaṃ tathāpare |
prāṇāpānagatī ruddhvā prāṇāyāmaparāyaṇāḥ ||
हिन्दी अनुवाद
प्राणायाम में लगे कुछ लोग प्राण और अपान की गति रोककर अपान में प्राण को और प्राण में अपान को होम करते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 4.29 का अर्थ क्या है?
प्राणायाम में लगे कुछ लोग प्राण और अपान की गति रोककर अपान में प्राण को और प्राण में अपान को होम करते हैं।
भगवद्गीता 4.29 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।