भगवद्गीता · अध्याय 3, श्लोक 42 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 3.42 · इन्द्रियाणि परं मनः

इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः परं मनः ।
मनसस्तु परा बुद्धिर्यो बुद्धेः परतस्तु सः ॥

indriyāṇi parāṇyāhurindriyebhyaḥ paraṃ manaḥ |
manasastu parā buddhiryo buddheḥ paratastu saḥ ||

हिन्दी अनुवाद

इन्द्रियों को ऊँचा कहा जाता है; इन्द्रियों से ऊँचा मन है, मन से ऊँची बुद्धि है, और जो बुद्धि से भी परे है, वह आत्मा है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है। इस अध्याय में 43 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 3.42 का अर्थ क्या है?

इन्द्रियों को ऊँचा कहा जाता है; इन्द्रियों से ऊँचा मन है, मन से ऊँची बुद्धि है, और जो बुद्धि से भी परे है, वह आत्मा है।

भगवद्गीता 3.42 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।