भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 39 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 2.39 · एषा तेऽभिहिता सांख्ये

एषा तेऽभिहिता सांख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां शृणु ।
बुद्ध्या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि ॥

eṣā te’bhihitā sāṃkhye buddhiryoge tvimāṃ śṛṇu |
buddhyā yukto yayā pārtha karmabandhaṃ prahāsyasi ||

हिन्दी अनुवाद

यह बुद्धि तुम्हें सांख्य के अनुसार बताई गई। अब इसे योग के अनुसार सुनो; हे पार्थ, इस बुद्धि से युक्त होकर तुम कर्म के बंधन को तोड़ दोगे।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 2.39 का अर्थ क्या है?

यह बुद्धि तुम्हें सांख्य के अनुसार बताई गई। अब इसे योग के अनुसार सुनो; हे पार्थ, इस बुद्धि से युक्त होकर तुम कर्म के बंधन को तोड़ दोगे।

भगवद्गीता 2.39 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।