भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 28 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 2.28 · अव्यक्तादीनि भूतानि भारत

अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत ।
अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना ॥

avyaktādīni bhūtāni vyaktamadhyāni bhārata |
avyaktanidhanānyeva tatra kā paridevanā ||

हिन्दी अनुवाद

हे भारत, सभी प्राणी जन्म से पहले अप्रकट थे, बीच में प्रकट होते हैं और मृत्यु के बाद फिर अप्रकट हो जाते हैं। इसमें विलाप की क्या बात है?

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 2.28 का अर्थ क्या है?

हे भारत, सभी प्राणी जन्म से पहले अप्रकट थे, बीच में प्रकट होते हैं और मृत्यु के बाद फिर अप्रकट हो जाते हैं। इसमें विलाप की क्या बात है?

भगवद्गीता 2.28 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।