भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 27 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 2.27 · जातस्य हि ध्रुवो जन्म च

जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च ।
तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि ॥

jātasya hi dhruvo mṛtyurdhruvaṃ janma mṛtasya ca |
tasmādaparihārye’rthe na tvaṃ śocitumarhasi ||

हिन्दी अनुवाद

क्योंकि जो जन्मा है उसकी मृत्यु निश्चित है, और जो मरा है उसका जन्म निश्चित है। इसलिए जो टल नहीं सकता, उसके लिए शोक मत करो।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 2.27 का अर्थ क्या है?

क्योंकि जो जन्मा है उसकी मृत्यु निश्चित है, और जो मरा है उसका जन्म निश्चित है। इसलिए जो टल नहीं सकता, उसके लिए शोक मत करो।

भगवद्गीता 2.27 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।