भगवद्गीता · अध्याय 18, श्लोक 51 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 18.51 · बुद्ध्या विशुद्ध्या च
बुद्ध्या विशुद्ध्या युक्तो धृत्यात्मानं नियम्य च ।
शब्दादीन्विषयांस्त्यक्त्वा रागद्वेषौ व्युदस्य च ॥
buddhyā viśuddhyā yukto dhṛtyātmānaṃ niyamya ca |
śabdādīnviṣayāṃstyaktvā rāgadveṣau vyudasya ca ||
हिन्दी अनुवाद
शुद्ध बुद्धि से युक्त होकर, धृति से अपने आप को वश में करके, शब्द आदि विषयों को छोड़कर, राग और द्वेष को दूर हटाकर —
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 78 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 18.51 का अर्थ क्या है?
शुद्ध बुद्धि से युक्त होकर, धृति से अपने आप को वश में करके, शब्द आदि विषयों को छोड़कर, राग और द्वेष को दूर हटाकर —
भगवद्गीता 18.51 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।