भगवद्गीता · अध्याय 18, श्लोक 41 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 18.41 · ब्राह्मणक्षत्रियविशां च

ब्राह्मणक्षत्रियविशां शूद्राणां च परन्तप ।
कर्माणि प्रविभक्तानि स्वभावप्रभवैर्गुणैः ॥

brāhmaṇakṣatriyaviśāṃ śūdrāṇāṃ ca parantapa |
karmāṇi pravibhaktāni svabhāvaprabhavairguṇaiḥ ||

हिन्दी अनुवाद

हे परन्तप, ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों के, तथा शूद्रों के भी कर्म उनके स्वभाव से उत्पन्न गुणों के अनुसार बाँटे गए हैं।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 78 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 18.41 का अर्थ क्या है?

हे परन्तप, ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों के, तथा शूद्रों के भी कर्म उनके स्वभाव से उत्पन्न गुणों के अनुसार बाँटे गए हैं।

भगवद्गीता 18.41 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।