भगवद्गीता · अध्याय 18, श्लोक 29 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 18.29 · बुद्धेर्भेदं धृतेश्चैव

बुद्धेर्भेदं धृतेश्चैव गुणतस्त्रिविधं शृणु ।
प्रोच्यमानमशेषेण पृथक्त्वेन धनंजय ॥

buddherbhedaṃ dhṛteścaiva guṇatastrividhaṃ śṛṇu |
procyamānamaśeṣeṇa pṛthaktvena dhanaṃjaya ||

हिन्दी अनुवाद

हे धनञ्जय, अब गुणों के अनुसार बुद्धि और धृति के भी तीन-तीन भेद पूरे विस्तार से, अलग-अलग सुनो।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 78 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 18.29 का अर्थ क्या है?

हे धनञ्जय, अब गुणों के अनुसार बुद्धि और धृति के भी तीन-तीन भेद पूरे विस्तार से, अलग-अलग सुनो।

भगवद्गीता 18.29 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।