भगवद्गीता · अध्याय 18, श्लोक 19 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 18.19 · ज्ञानं कर्म च कर्ता च
ज्ञानं कर्म च कर्ता च त्रिधैव गुणभेदतः ।
प्रोच्यते गुणसंख्याने यथावच्छृणु तान्यपि ॥
jñānaṃ karma ca kartā ca tridhaiva guṇabhedataḥ |
procyate guṇasaṃkhyāne yathāvacchṛṇu tānyapi ||
हिन्दी अनुवाद
गुणों के सिद्धान्त में ज्ञान, कर्म और कर्ता — तीनों को गुणों के भेद से तीन-तीन प्रकार का बताया गया है। इन्हें भी ठीक-ठीक सुनो।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 78 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 18.19 का अर्थ क्या है?
गुणों के सिद्धान्त में ज्ञान, कर्म और कर्ता — तीनों को गुणों के भेद से तीन-तीन प्रकार का बताया गया है। इन्हें भी ठीक-ठीक सुनो।
भगवद्गीता 18.19 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।