भगवद्गीता · अध्याय 15, श्लोक 8 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 15.8 · शरीरं यदवाप्नोति

शरीरं यदवाप्नोति यच्चाप्युत्क्रामतीश्वरः ।
गृहीत्वैतानि संयाति वायुर्गन्धानिवाशयात् ॥

śarīraṃ yadavāpnoti yaccāpyutkrāmatīśvaraḥ |
gṛhītvaitāni saṃyāti vāyurgandhānivāśayāt ||

हिन्दी अनुवाद

शरीर का स्वामी जब शरीर ग्रहण करता है और जब उसे छोड़ता है, तब इन्हें साथ लेकर वैसे ही चला जाता है जैसे हवा फूलों के स्थान से सुगन्ध ले जाती है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 15, पुरुषोत्तमयोग (पुरुषोत्तम योग) में कहा है। इस अध्याय में 20 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 15.8 का अर्थ क्या है?

शरीर का स्वामी जब शरीर ग्रहण करता है और जब उसे छोड़ता है, तब इन्हें साथ लेकर वैसे ही चला जाता है जैसे हवा फूलों के स्थान से सुगन्ध ले जाती है।

भगवद्गीता 15.8 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 15, पुरुषोत्तमयोग (पुरुषोत्तम योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।