भगवद्गीता · अध्याय 15, श्लोक 19 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 15.19 · यो मामेवमसंमूढो जानाति
यो मामेवमसंमूढो जानाति पुरुषोत्तमम् ।
स सर्वविद्भजति मां सर्वभावेन भारत ॥
yo māmevamasaṃmūḍho jānāti puruṣottamam |
sa sarvavidbhajati māṃ sarvabhāvena bhārata ||
हिन्दी अनुवाद
हे भारत, जो मोह से मुक्त होकर मुझे इस प्रकार पुरुषोत्तम जानता है, वह सब कुछ जानता है और पूरे भाव से मेरी भक्ति करता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 15, पुरुषोत्तमयोग (पुरुषोत्तम योग) में कहा है। इस अध्याय में 20 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 15.19 का अर्थ क्या है?
हे भारत, जो मोह से मुक्त होकर मुझे इस प्रकार पुरुषोत्तम जानता है, वह सब कुछ जानता है और पूरे भाव से मेरी भक्ति करता है।
भगवद्गीता 15.19 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 15, पुरुषोत्तमयोग (पुरुषोत्तम योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।