भगवद्गीता · अध्याय 15, श्लोक 1 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 15.1 · ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं
ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम् ।
छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित् ॥
ūrdhvamūlamadhaḥśākhamaśvatthaṃ prāhuravyayam |
chandāṃsi yasya parṇāni yastaṃ veda sa vedavit ||
हिन्दी अनुवाद
श्रीभगवान बोले: एक अविनाशी अश्वत्थ वृक्ष बताया जाता है, जिसकी जड़ें ऊपर हैं और शाखाएँ नीचे। वेद के छन्द उसके पत्ते हैं। जो इस वृक्ष को जानता है, वही वेद को जानता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 15, पुरुषोत्तमयोग (पुरुषोत्तम योग) में कहा है। इस अध्याय में 20 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 15.1 का अर्थ क्या है?
श्रीभगवान बोले: एक अविनाशी अश्वत्थ वृक्ष बताया जाता है, जिसकी जड़ें ऊपर हैं और शाखाएँ नीचे। वेद के छन्द उसके पत्ते हैं। जो इस वृक्ष को जानता है, वही वेद को जानता है।
भगवद्गीता 15.1 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 15, पुरुषोत्तमयोग (पुरुषोत्तम योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।