भगवद्गीता · अध्याय 14, श्लोक 4 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 14.4 · सर्वयोनिषु कौन्तेय याः
सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तयः संभवन्ति याः ।
तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता ॥
sarvayoniṣu kaunteya mūrtayaḥ saṃbhavanti yāḥ |
tāsāṃ brahma mahadyonirahaṃ bījapradaḥ pitā ||
हिन्दी अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र, सभी योनियों में जो भी शरीर उत्पन्न होते हैं, उन सबकी माता महद् ब्रह्म है और बीज देने वाला पिता मैं हूँ।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 27 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 14.4 का अर्थ क्या है?
हे कुन्तीपुत्र, सभी योनियों में जो भी शरीर उत्पन्न होते हैं, उन सबकी माता महद् ब्रह्म है और बीज देने वाला पिता मैं हूँ।
भगवद्गीता 14.4 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।