भगवद्गीता · अध्याय 14, श्लोक 26 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 14.26 · मां च योऽव्यभिचारेण
मां च योऽव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते ।
स गुणान्समतीत्यैतान्ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥
māṃ ca yo’vyabhicāreṇa bhaktiyogena sevate |
sa guṇānsamatītyaitānbrahmabhūyāya kalpate ||
हिन्दी अनुवाद
और जो अटल भक्तियोग से मेरी सेवा करता है, वह इन गुणों को पार करके ब्रह्मभाव के योग्य हो जाता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 27 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 14.26 का अर्थ क्या है?
और जो अटल भक्तियोग से मेरी सेवा करता है, वह इन गुणों को पार करके ब्रह्मभाव के योग्य हो जाता है।
भगवद्गीता 14.26 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।